सरोगेसी क्या है? आवश्यकता, प्रक्रिया, खर्च

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Surrogacy meaning in hindi
4 hours ago · by Shiva Vikas Kumar · 0 comments

सरोगेसी क्या है? आवश्यकता, प्रक्रिया, खर्च और सरोगेट मदर के लिए इंश्योरेंस का महत्व

“संतान का सुख हर दंपत्ति के जीवन का सबसे खूबसूरत सपना होता है। लेकिन कभी-कभी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं या चिकित्सीय कारणों से यह सपना अधूरा रह जाता है। ऐसे में मेडिकल साइंस की प्रगति एक वरदान बनकर उभरी है, जिसे हम ‘सरोगेसी’ (Surrogacy) के नाम से जानते हैं।”

सरोगेसी उन परिवारों के लिए आशा की एक नई किरण है, जो प्राकृतिक रूप से माता-पिता बनने में असमर्थ हैं। यह न केवल एक तकनीकी प्रक्रिया है, बल्कि एक निस्वार्थ मानवीय सहयोग भी है। भारत में बदलते कानूनों और बढ़ती जागरूकता के बीच, सरोगेसी से जुड़ी सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।इस विशेष लेख में, हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि सरोगेसी क्या है, इसकी कानूनी प्रक्रिया क्या है, इसमें कितना खर्च आता है और सबसे महत्वपूर्ण इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सरोगेट मदर के लिए इंश्योरेंस (Surrogacy Insurance) की क्या भूमिका है।

सरोगेसी क्या है? (Surrogacy meaning in hindi)

सरोगेसी एक ऐसी चिकित्सीय और कानूनी व्यवस्था है, जिसमें एक महिला (जिसे सरोगेट मदर कहा जाता है) किसी अन्य व्यक्ति या दंपत्ति (इच्छुक माता-पिता) के लिए गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म देने के लिए सहमत होती है। जन्म के बाद, बच्चा कानूनी रूप से इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है।

यह प्रक्रिया मुख्य रूप से दो तरीकों से पूरी की जाती है:

  1. जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy): यह सबसे प्रचलित तरीका है। इसमें IVF (In-Vitro Fertilization) तकनीक का उपयोग करके इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु से लैब में एक भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। इसके बाद, इस भ्रूण को सरोगेट मदर के गर्भाशय में इम्प्लांट कर दिया जाता है। इस स्थिति में, सरोगेट मदर का बच्चे के साथ कोई आनुवंशिक (जेनेटिक) संबंध नहीं होता।
  2. ट्रेडिशनल सरोगेसी (Traditional Surrogacy): इसमें सरोगेट मदर के अपने अंडाणु का उपयोग किया जाता है, इसलिए वह बच्चे की जैविक माँ (Biological Mother) भी होती है। (नोट: आधुनिक कानूनों और जटिलताओं के कारण अब यह तरीका बहुत कम अपनाया जाता है)।

सरोगेसी की आवश्यकता क्यों होती है?

सरोगेसी का विकल्प उन दंपत्तियों के लिए एक वरदान साबित होता है, जो निम्नलिखित चिकित्सीय कारणों से माता-पिता बनने का सुख नहीं पा सकते:

  1. गर्भाशय संबंधी समस्याएं : यदि महिला का गर्भाशय जन्म से अनुपस्थित हो, असामान्य आकार का हो, या किसी बीमारी (जैसे फाइब्रॉएड या कैंसर) के कारण उसे हटा दिया गया हो।
  2. बार-बार गर्भपात : जब महिला गर्भधारण तो कर लेती है, लेकिन किसी अज्ञात शारीरिक कारण से गर्भ ठहर नहीं पाता और बार-बार गर्भपात हो जाता है।
  3. IVF की विफलता : कई बार आईवीएफ (IVF) के कई प्रयासों के बाद भी भ्रूण गर्भाशय में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित नहीं हो पाता।
  4. गंभीर स्वास्थ्य जोखिम : यदि महिला को हृदय रोग, किडनी की गंभीर बीमारी या कोई ऐसी स्थिति है जहाँ गर्भधारण करना उसकी जान के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
  5. अस्पष्टीकृत बांझपन (Unexplained Infertility): जब सभी मेडिकल रिपोर्ट्स सामान्य होने के बावजूद दंपत्ति प्राकृतिक रूप से या अन्य उपचारों के माध्यम से गर्भधारण नहीं कर पाते।

सरोगेसी की प्रक्रिया (surrogacy process in hindi)

सरोगेसी की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है जैसे –

  1. प्रारंभिक परामर्श और मेडिकल जांच : सबसे पहले इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों का विस्तृत मेडिकल चेकअप किया जाता है। इसमें शारीरिक स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता (Fertility) और मनोवैज्ञानिक स्थिति (Psychological health) की जांच शामिल है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रक्रिया सुरक्षित रहेगी।
  2. कानूनी औपचारिकताएं : भारत में सरोगेसी के नए कानूनों (Surrogacy Regulation Act) के तहत दोनों पक्षों के बीच एक विस्तृत कानूनी समझौता किया जाता है। इसमें सरोगेट मदर के अधिकार, बच्चे की जिम्मेदारी और अन्य महत्वपूर्ण शर्तें स्पष्ट रूप से लिखी जाती हैं।
  3. आईवीएफ प्रक्रिया : इच्छुक माता-पिता (या डोनर) के अंडाणु और शुक्राणु को लैब में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया In-Vitro Fertilization (IVF) कहलाती है।
  4. भ्रूण प्रत्यारोपण (Embryo Transfer): जब भ्रूण पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो एक छोटी सी मेडिकल प्रक्रिया के माध्यम से उसे सरोगेट मदर के गर्भाशय (Uterus) में सावधानीपूर्वक स्थानांतरित (Implant) कर दिया जाता है।
  5. गर्भावस्था और स्वास्थ्य निगरानी : गर्भावस्था पुष्ट होने के बाद, अगले नौ महीनों तक सरोगेट मदर की नियमित मेडिकल जांच और देखभाल की जाती है। इसमें उचित पोषण, नियमित अल्ट्रासाउंड और मानसिक स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है।
  6.  डिलीवरी और कानूनी हस्तांतरण : बच्चे के जन्म के बाद, सभी कानूनी दस्तावेजों के अनुसार उसे इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है। जन्म प्रमाण पत्र पर कानूनी तौर पर इच्छुक माता-पिता का ही नाम दर्ज होता है।

सरोगेसी में कितना खर्च आता है? (Cost of Surrogacy in India)

भारत में सरोगेसी की कुल लागत कई महत्वपूर्ण कारकों और चिकित्सा प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है। चूँकि हर मामला अलग होता है, इसलिए खर्च में भी भिन्नता हो सकती है। मुख्य रूप से खर्च इन श्रेणियों में विभाजित होता है:

  1. IVF और लैब प्रक्रिया की लागत: इसमें अंडाणु और शुक्राणु के मिलन से भ्रूण तैयार करने और उसे सरोगेट मदर के गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने का खर्च शामिल है।
  2. अस्पताल और विशेषज्ञ की फीस: प्रसूति विशेषज्ञ (Obstetrician), आईवीएफ विशेषज्ञ और अस्पताल के बेड व सुविधाओं का शुल्क।
  3. सरोगेट मदर की देखभाल: गर्भावस्था के दौरान सरोगेट मदर का पोषण, रहने का खर्च (यदि आवश्यक हो), और अन्य व्यक्तिगत देखभाल।
  4. कानूनी और दस्तावेजी खर्च (Legal Fees): सरोगेसी एक्ट के तहत अनुबंध (Contract) तैयार करने, अदालती कार्यवाही और कानूनी विशेषज्ञों की फीस
  5. दवाइयां और डायग्नोस्टिक टेस्ट: नौ महीनों तक चलने वाली दवाइयां, नियमित अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और अन्य मेडिकल स्क्रीनिंग।
  6. सरोगेसी इंश्योरेंस प्रीमियम: भारत के नए नियमों के अनुसार, सरोगेट मदर के लिए स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) अनिवार्य है, जिसका प्रीमियम इच्छुक माता-पिता को वहन करना होता है।

भारत में अनुमानित कुल खर्च:

आमतौर पर, भारत में सरोगेसी का कुल पैकेज ₹12 लाख से ₹25 लाख के बीच हो सकता है। यह राशि शहर, अस्पताल के चयन और केस की जटिलता के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है।

भारत में सरोगेसी के नियम (Surrogacy Laws in India)

भारत में सरोगेसी को विनियमित करने के लिए सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Surrogacy Regulation Act, 2021) प्रभावी है। इसके प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:

  • केवल परोपकारी (Altruistic) सरोगेसी की अनुमति: भारत में अब केवल ‘परोपकारी सरोगेसी’ ही वैध है। इसका अर्थ है कि सरोगेट मदर को गर्भावस्था के दौरान होने वाले मेडिकल खर्चों और बीमा (Insurance) के अलावा कोई अन्य नकद पारिश्रमिक या व्यावसायिक लाभ नहीं दिया जा सकता।
  • व्यावसायिक (Commercial) सरोगेसी पर प्रतिबंध: धन के बदले सरोगेसी करना या करवाना भारत में पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।
  • सरोगेट मदर के लिए पात्रता: कानून के अनुसार, सरोगेट मदर का विवाहित होना अनिवार्य है और उसका अपना कम से कम एक जीवित बच्चा होना चाहिए। साथ ही, वह अपने जीवन में केवल एक बार ही सरोगेट बन सकती है।
  • चिकित्सा आवश्यकता का प्रमाण (Medical Necessity): सरोगेसी की अनुमति तभी दी जाती है जब जिला मेडिकल बोर्ड यह प्रमाणित करे कि इच्छुक दंपत्ति किसी ठोस चिकित्सीय कारण से बच्चा पैदा करने में असमर्थ हैं।
  • पात्रता मानदंड (Eligibility for Parents): वर्तमान नियमों के अनुसार, केवल वे भारतीय दंपत्ति (महिला की आयु 23-50 वर्ष और पुरुष की 26-55 वर्ष) जो कानूनी रूप से विवाहित हैं, सरोगेसी का विकल्प चुन सकते हैं। इसके अलावा, कुछ विशेष स्थितियों में विधवा या तलाकशुदा महिलाएं भी इसके लिए पात्र हो सकती हैं।
  • बीमा का अनिवार्य प्रावधान: नए कानून के तहत, इच्छुक माता-पिता के लिए सरोगेट मदर के नाम पर 36 महीने (3 साल) का स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) कवर लेना अनिवार्य है, ताकि प्रसव के बाद की जटिलताओं में उसे सुरक्षा मिल सके।

सरोगेट मदर के लिए इंश्योरेंस का महत्व (Importance of Surrogacy Insurance)

सरोगेसी की प्रक्रिया में सरोगेट मदर की सेहत और सुरक्षा सर्वोपरि है। भारत के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, इच्छुक माता-पिता (Intended Parents) के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य है कि वे सरोगेट मदर के नाम पर एक व्यापक स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) और जीवन बीमा पॉलिसी खरीदें।

इंश्योरेंस क्यों जरूरी है?

  1. कानूनी अनिवार्यता (Legal Mandate): नए नियमों के अनुसार, सरोगेट मदर के लिए 36 महीने (3 साल) का बीमा कवर होना जरूरी है। यह प्रसव के दौरान और उसके बाद होने वाली किसी भी स्वास्थ्य संबंधी जटिलता के लिए सुरक्षा प्रदान करता है।
  2. जटिलताओं में आर्थिक सुरक्षा: गर्भावस्था के दौरान कई बार अनपेक्षित मेडिकल इमरजेंसी (जैसे प्री-एक्लेम्पसिया या समय से पहले प्रसव) आ सकती हैं। बीमा इन भारी खर्चों को कवर करता है ताकि इच्छुक माता-पिता पर अचानक वित्तीय बोझ न आए।
  3. डिलीवरी और पोस्ट-केयर: यह न केवल अस्पताल में भर्ती होने के खर्च को कवर करता है, बल्कि प्रसव के बाद सरोगेट माँ की रिकवरी और फॉलो-अप टेस्ट के खर्चों में भी मदद करता है।
  4. मानसिक शांति: जब स्वास्थ्य जोखिमों के लिए एक मजबूत वित्तीय कवच मौजूद होता है, तो सरोगेट मदर और इच्छुक माता-पिता दोनों तनावमुक्त होकर इस यात्रा का आनंद ले पाते हैं।

इस बीमा में क्या कवर होता है?

  1. अस्पताल में भर्ती (Hospitalization): प्रसव या गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी बीमारी के लिए अस्पताल का खर्च।
  2. प्रसव संबंधी जटिलताएं: सिजेरियन डिलीवरी या प्रसव के बाद होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं।
  3. दवाइयां और डायग्नोस्टिक्स: नौ महीनों के दौरान होने वाले सभी जरूरी टेस्ट और दवाइयों का खर्च।
  4. आपातकालीन सहायता: किसी भी गंभीर स्थिति में एम्बुलेंस और तत्काल उपचार की सुविधा।

सही इंश्योरेंस चुनते समय सावधानी

चूंकि सरोगेसी के लिए 36 महीने का बीमा कवर लेना अब एक कानूनी अनिवार्यता है, इसलिए सही प्लान का चुनाव करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक आदर्श पॉलिसी वह है जो न केवल सरकारी नियमों का पालन करे, बल्कि आपातकालीन स्थिति में सरोगेट मदर को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा भी प्रदान करे।

यहीं पर SafeTree जैसे अनुभवी प्लेटफॉर्म आपकी मदद कर सकते हैं। हम जटिल बीमा नियमों को सरल बनाकर आपको ऐसे विकल्प प्रदान करते हैं जो:

  • कानूनी अनुपालन: भारत सरकार के 36 महीने के अनिवार्य बीमा नियम के अनुरूप हों।
  • कैशलेस सुविधा: इलाज के दौरान आपको बड़े बिलों के भुगतान की चिंता न हो और कैशलेस अस्पताल नेटवर्क तक आपकी पहुँच आसान हो।
  • पारदर्शिता: क्लेम की प्रक्रिया सरल और स्पष्ट हो ताकि आप अपना पूरा ध्यान अपने भविष्य के बच्चे के स्वागत और सरोगेट मदर की देखभाल पर लगा सकें।

एक सूचित निर्णय और सही मार्गदर्शन आपकी इस भावनात्मक यात्रा को आर्थिक रूप से सुरक्षित और तनावमुक्त बना सकता है।

निष्कर्ष: एक नई शुरुआत की ओर कदम

सरोगेसी केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उन दंपत्तियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है जो माता-पिता बनने का सुख पाना चाहते हैं। सही जानकारी, कानूनी नियमों का पालन और विशेषज्ञों की देखरेख इस यात्रा को न केवल सफल बनाती है, बल्कि सुरक्षित भी रखती है।जैसा कि हमने चर्चा की, सरोगेट मदर के लिए 36 महीने का इंश्योरेंस कवर सुनिश्चित करना न केवल एक कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि यह पूरी प्रक्रिया को आर्थिक और मानसिक रूप से संतुलित रखने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। एक मजबूत वित्तीय कवच होने से आप अनपेक्षित मेडिकल खर्चों की चिंता छोड़ कर, अपने आने वाले बच्चे के स्वागत की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

यदि आप भी सरोगेसी के माध्यम से अपने परिवार को पूरा करने की योजना बना रहे हैं, तो हर कदम पर पूरी पारदर्शिता और सही सुरक्षा (Insurance) के साथ आगे बढ़ना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय होगा।

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